Uttarakhand – CT News https://ctnews.in News Portal Fri, 04 Sep 2026 12:31:02 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://ctnews.in/wp-content/uploads/2024/07/cropped-CT_NEWS_LOGO-32x32.png Uttarakhand – CT News https://ctnews.in 32 32 मुख्यमंत्री ने किसान-केंद्रित मोबाइल एप ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ का किया शुभारंभ https://ctnews.in/chief-minister-launches-farmer-centric-mobile-app-manorama-krishi-rakshak/ https://ctnews.in/chief-minister-launches-farmer-centric-mobile-app-manorama-krishi-rakshak/#respond Fri, 04 Sep 2026 12:29:01 +0000 https://ctnews.in/?p=69805

किसानों एवं स्वयं सहायता समूहों के लिए उपयोगी होगा ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ एप-मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय में मनोरमा डबराल जन कल्याण समिति द्वारा विकसित किसान-केंद्रित मोबाइल एप ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ का शुभारंभ किया।
मुख्यमंत्री ने ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ एप को किसानों एवं स्वयं सहायता समूहों के लिए उपयोगी बताते हुए इस पहल के लिए संस्था को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के बेहतर उपयोग से किसानों को कृषि संबंधी आवश्यक जानकारियां एवं सेवाएं सुगमता से उपलब्ध कराने में इस प्रकार की पहल उपयोगी साबित हो सकती है।

मनोरमा डबराल जन कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ एप के माध्यम से किसानों को रियल टाइम मौसम संबंधी जानकारी एवं अलर्ट, फसल-विशिष्ट कृषि सलाह, एआई आधारित फसल रोग पहचान, कृषि एवं बाजार संबंधी जानकारी तथा परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स से संबंधित सुविधाएं एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। एप में स्वयं सहायता समूहों एवं ग्रामीण उद्यमों को बाजार से जोड़ने से संबंधित सुविधाओं को भी शामिल किया गया है। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि एप को किसानों की व्यावहारिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से किसानों को कृषि उत्पादन से लेकर बाजार तक आवश्यक डिजिटल सहयोग उपलब्ध कराना है।

इस अवसर पर कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी, मनोरमा डबराल जन कल्याण समिति से श्रीमती कमला डबराल, राजेश डबराल, अंशुल, प्रांजल नौडियाल एवं सूरवीर सिंह कठैत उपस्थित रहे।

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मुख्यमंत्री धामी ने वन-क्लिक के माध्यम से 9 लाख 91 हजार 914 लाभार्थियों को जारी की अगस्त माह की सामाजिक सुरक्षा पेंशन https://ctnews.in/chief-minister-dhami-released-the-social-security-pension-for-the-month-of-august-to-991914-beneficiaries-via-a-single-click/ https://ctnews.in/chief-minister-dhami-released-the-social-security-pension-for-the-month-of-august-to-991914-beneficiaries-via-a-single-click/#respond Fri, 04 Sep 2026 12:23:28 +0000 https://ctnews.in/?p=69801

  • 147 करोड़ 05 लाख रुपये की पेंशन धनराशि लाभार्थियों के खातों में भेजी गई
  • अगस्त माह में 5,605 नए लाभार्थियों की पेंशन स्वीकृत
  • जिन पात्र लाभार्थियों का आधार नहीं बन पा रहा, उन्हें चिन्हित कर अकाउंट बेस्ड पेमेंट की व्यवस्था की जाए—मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में समाज कल्याण विभाग की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत माह अगस्त 2026 की पेंशन किस्त का वन-क्लिक के माध्यम से भुगतान किया। इसके माध्यम से 9 लाख 91 हजार 914 लाभार्थियों के खातों में  147 करोड़ 05 लाख रुपये की पेंशन धनराशि भेजी गई। अगस्त माह में विभिन्न पेंशन योजनाओं के अंतर्गत 5,605 नए लाभार्थियों की पेंशन भी स्वीकृत की गई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के कमजोर, जरूरतमंद एवं वंचित वर्गों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। सरकार का प्रयास है कि प्रत्येक पात्र व्यक्ति को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सरलता एवं समयबद्धता से मिले। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि पेंशन योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को नियमित रूप से पेंशन का भुगतान कर रही है। उन्होंने कहा कि पेंशन व्यवस्था को सरल, पारदर्शी एवं लाभार्थी केंद्रित बनाते हुए प्रत्येक पात्र व्यक्ति को योजनाओं से आच्छादित करने के लिए निरंतर कार्य किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिये कि जिन पात्र लाभार्थियों का किसी कारणवश आधार नहीं बन पा रहा है, उन्हें चिन्हित कर उनके लिए अकाउंट बेस्ड पेमेंट की व्यवस्था की जाए, ताकि आधार संबंधी समस्या के कारण कोई भी पात्र लाभार्थी पेंशन के लाभ से वंचित न रहे।

प्रस्तुतीकरण के दौरान बताया गया कि अगस्त 2026 में वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग, किसान, परित्यक्ता, भरण-पोषण अनुदान, तीलू रौतेली एवं बौना पेंशन योजनाओं के कुल 9 लाख 91 हजार 914 लाभार्थियों के लिए 147 करोड़ 05 लाख 51 हजार रुपये की धनराशि निर्धारित की गई है। बताया गया कि कुल पेंशन लाभार्थियों में 2 लाख 14 हजार 711 लाभार्थी राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के अंतर्गत तथा 7 लाख 77 हजार 203 लाभार्थी राज्य स्तर पर आच्छादित हैं। अगस्त माह के पेंशन भुगतान में लगभग 140 करोड़ 11 लाख रुपये राज्यांश तथा 6 करोड़ 94 लाख रुपये केंद्रांश है।

प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि अगस्त माह में विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत कुल 5,605 नई पेंशन स्वीकृत की गई हैं। इनमें वृद्धावस्था पेंशन के 3,945, विधवा पेंशन के 1,000, दिव्यांग पेंशन के 416, किसान पेंशन के 106, परित्यक्ता पेंशन के 23 तथा भरण-पोषण अनुदान के 115  लाभार्थी शामिल हैं।

बैठक में आगामी कार्यक्रमों के संबंध में भी प्रस्तुतीकरण दिया गया। बताया गया कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, भारत सरकार द्वारा 18 एवं 19 सितम्बर 2026 को डॉ. अम्बेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र, जनपथ, नई दिल्ली में दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है। सम्मेलन में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता से संबंधित प्रमुख प्राथमिकताओं पर केंद्र, राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के बीच संवाद किया जाएगा।

इस अवसर पर समाज कल्याण मंत्री खजानदास, सचिव समाज कल्याण डॉ. श्रीधर बाबू अद्दांकी, अपर सचिव विक्रम यादव। संयुक्त सचिव धीरेंद्र सिंह, संयुक्त निदेशक गीताराम नौटियाल, सहायक निदेशक श्रीमती हेमलता पांडेय एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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मुख्यमंत्री धामी का विकास प्राधिकरणों को सख्त निर्देश—लंबित मास्टर प्लान और परियोजनाओं में तेजी लाएं, हर कार्य की तय हो समय-सीमा https://ctnews.in/chief-minister-dhami-issues-strict-directives-to-development-authorities-expedite-pending-master-plans-and-projects-set-a-timeframe-for-every-task/ https://ctnews.in/chief-minister-dhami-issues-strict-directives-to-development-authorities-expedite-pending-master-plans-and-projects-set-a-timeframe-for-every-task/#respond Thu, 03 Sep 2026 02:27:03 +0000 https://ctnews.in/?p=69797

  • 15 अक्टूबर तक प्रदेश में बड़े स्तर पर शुरू और पूरे हों सौंदर्यीकरण के कार्य, G20 समिट की तर्ज पर दिखेगा नया स्वरूप
  • हर विकास प्राधिकरण में बनेगा Illegal Construction Monitoring Dashboard, संदिग्ध निर्माण से ध्वस्तीकरण तक रियल टाइम होगी निगरानी
  • शहरों में अनिवार्य होंगे सिटी पार्क और पिंक टॉयलेट, अगली बैठक तक 70 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के निर्देश
  • पार्किंग संकट का होगा स्थायी समाधान—MDDA और HRDA मल्टी-लेवल, सरफेस, पेरीफेरल पार्किंग व PPP मॉडल पर तैयार करेंगे कार्ययोजना
  • मुख्यमंत्री धामी का विकास प्राधिकरणों को सख्त निर्देश—लंबित मास्टर प्लान और परियोजनाओं में तेजी लाएं, 15 दिन में प्राधिकरण क्षेत्र की सभी सड़कें हों दुरुस्त, हर कार्य की तय हो समय-सीमा

देहरादून :  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज मुख्यमंत्री आवास में आवास विभाग के नियंत्रणाधीन समस्त विकास प्राधिकरणों की समीक्षा बैठक ली। मुख्यमंत्री ने विकास प्राधिकरणों के कार्यों की व्यापक समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विकास कार्यों में अनावश्यक देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान, परियोजनाओं, नागरिक सुविधाओं, सौंदर्यीकरण, पार्किंग, आवासीय योजनाओं और अवैध निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई से जुड़े प्रत्येक कार्य के लिए स्पष्ट समय-सीमा निर्धारित की जाए तथा संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन मास्टर प्लान एवं अन्य परियोजनाओं पर लंबे समय से कार्य लंबित है, उनमें तेजी लाई जाए। प्रत्येक लंबित कार्य की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करते हुए उसके पूरा होने की समय-सीमा निर्धारित की जाए और संबंधित अधिकारी की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका प्रभाव धरातल पर दिखाई देना चाहिए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में सौंदर्यीकरण कार्यों को प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिए कि इसी माह से सभी विकास प्राधिकरणों के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में सौंदर्यीकरण के कार्य प्रारंभ कर दिए जाएं। उन्होंने कहा कि इन कार्यों का स्वरूप और गुणवत्ता G20 समिट के दौरान किए गए सौंदर्यीकरण कार्यों की तरह आकर्षक और प्रभावी होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि 15 अक्टूबर तक सौंदर्यीकरण के कार्य पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि यदि किसी कार्य के लिए बजट की आवश्यकता है तो उसकी व्यवस्था भी की जाए, लेकिन बजट की कमी को कार्यों में देरी का कारण अथवा बहाना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने विकास प्राधिकरणों के अधीन आने वाली सड़कों की स्थिति में तत्काल सुधार के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सभी सड़कों का सर्वे कर उनकी स्थिति का आकलन किया जाए और जहां सड़कें खराब हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर सुधार एवं मरम्मत का कार्य कराया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अगले 15 दिनों के भीतर प्राधिकरण के अंतर्गत आने वाली सभी सड़कों को बेहतर स्थिति में लाया जाए। उन्होंने कहा कि सड़कों की गुणवत्ता और सुधार कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी जनपदों में अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ प्राप्त कर चुके अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और बीपीएल परिवारों की विस्तृत सूची तैयार कर 15 दिन के भीतर मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि आवास योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचना चाहिए और इसकी नियमित समीक्षा की जानी आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने सभी शहरों में सिटी पार्क अनिवार्य रूप से विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सिटी पार्क में सामान्य टॉयलेट के साथ-साथ पिंक टॉयलेट की व्यवस्था भी अनिवार्य रूप से की जाए। इसके साथ ही शहरी, अर्द्धशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी आवश्यकता के अनुसार पिंक टॉयलेट विकसित किए जाएं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अगली समीक्षा बैठक तक प्रदेश में इस लक्ष्य का करीब 70 प्रतिशत हासिल कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सुविधाओं का विकास करते समय महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं का विशेष ध्यान रखा जाए।

मुख्यमंत्री ने ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश देते हुए कहा कि इसे सभी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों के साथ एकीकृत किया जाए। उन्होंने कहा कि भवन मानचित्र स्वीकृति की प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाया जाना चाहिए, ताकि नागरिकों को अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से सुगम हो सके।

अवैध निर्माण के मामलों पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण शुरू होने के बाद कार्रवाई करने की प्रतीक्षा न की जाए, बल्कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से शुरुआती स्तर पर ही अवैध निर्माण को चिन्हित किया जाए। उन्होंने GIS, सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए, ताकि संदिग्ध निर्माण की समय रहते पहचान हो सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि यदि किसी अवैध निर्माण के मामले में अधिकारियों की मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।

मुख्यमंत्री ने प्रत्येक विकास प्राधिकरण में Illegal Construction Monitoring Dashboard विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस डैशबोर्ड में संदिग्ध निर्माण की पहचान से लेकर निरीक्षण की तारीख, जारी किए गए नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तक प्रत्येक चरण की रियल टाइम स्थिति उपलब्ध होनी चाहिए। इससे अवैध निर्माण के विरुद्ध कार्रवाई में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित की जा सकेंगी।

मुख्यमंत्री ने विकास प्राधिकरणों की वेबसाइट को नागरिकों के लिए अधिक सरल और उपयोगी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की वेबसाइट ‘Citizen Friendly’ होनी चाहिए, ताकि आम नागरिकों को योजनाओं, मानचित्र स्वीकृति, शुल्क, नियमों और अन्य सेवाओं से संबंधित जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके। उन्होंने वेबसाइट को सरल बनाने के लिए प्रस्तावित चैटबॉट के विकास की प्रगति की भी जानकारी ली और अधिकारियों को निर्देश दिए कि तकनीक आधारित सुविधाओं का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए।

मुख्यमंत्री ने देहरादून एवं हरिद्वार क्षेत्र में पार्किंग की समस्या को गंभीरता से लेते हुए ऐसी नगर पालिकाओं को चिन्हित करने के निर्देश दिए जहां पर्याप्त पार्किंग सुविधा उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि MDDA और HRDA संबंधित नगर निकायों के साथ समन्वय स्थापित कर मल्टी-लेवल पार्किंग, सरफेस पार्किंग, पेरीफेरल पार्किंग तथा सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी PPP मॉडल के माध्यम से पार्किंग विकसित करने की ठोस कार्ययोजना तैयार करें। उन्होंने कहा कि बढ़ते शहरीकरण के साथ पार्किंग की समस्या का स्थायी समाधान आवश्यक है और इसके लिए भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार की जाएं।

मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जनपद में आवासीय परियोजनाओं की प्रगति की भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक जनपद में आवासीय परियोजनाएं किस स्तर तक पहुंची हैं, अब तक कितने आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है और कितने आवास निर्माणाधीन हैं, इसका स्पष्ट विवरण तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि आवासीय परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और जहां कार्य की गति धीमी है, वहां आवश्यक कार्रवाई कर उसे तेज किया जाए।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास प्राधिकरणों में नक्शा स्वीकृति, अवैध निर्माण, विकास शुल्क, मास्टर प्लान और प्रवर्तन की अलग-अलग व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जहां संभव हो, वहां प्रक्रियाओं में एकरूपता लाई जाए। उन्होंने अधिकारियों से इस संबंध में व्यावहारिक प्रस्ताव तैयार करने को कहा, ताकि प्रदेश में नागरिकों को विकास प्राधिकरणों से संबंधित सेवाओं के लिए स्पष्ट, सरल और पारदर्शी व्यवस्था मिल सके।

मुख्यमंत्री ने Land Pooling Scheme को लेकर भी अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कम से कम 2 से 3 विकास क्षेत्रों में लैंड पूलिंग योजना लागू करने की कार्ययोजना तैयार की जाए। इस योजना के अंतर्गत किसानों और भूमि मालिकों को होने वाले लाभ का स्पष्ट एवं पारदर्शी मॉडल तैयार किया जाए और उन्हें योजना की पूरी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि विकास की योजनाओं में भूमि मालिकों के हितों और भविष्य के लाभ को स्पष्ट रूप से सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास प्राधिकरणों की भूमिका केवल शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जिन ग्रामीण एवं अर्द्धशहरी क्षेत्रों में विकास प्राधिकरणों का क्षेत्र आता है, वहां भी नागरिक सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों के साथ समन्वय कर स्ट्रीट लाइट, पेयजल, बैठने की व्यवस्था सहित आवश्यक नागरिक सुविधाओं को विकसित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि प्राधिकरण क्षेत्र में आने वाले ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों में भी लोगों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीक का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने के साथ-साथ अवैध निर्माण पर प्रभावी नियंत्रण, योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में अनावश्यक देरी की कोई गुंजाइश नहीं है। प्रत्येक कार्य की समय-सीमा निर्धारित कर उसकी नियमित मॉनिटरिंग की जाए और लापरवाही अथवा अनावश्यक विलंब पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों का लाभ जनता को समय पर मिलना चाहिए और इसके लिए शासन से लेकर विभागीय स्तर तक प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी।

बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव विनय शंकर पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार सहित सभी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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सीएम धामी का स्पष्ट संदेश—परंपराएं अपनी जगह, लेकिन ज्ञान-विज्ञान, साइंस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और AI को अपनाना होगा https://ctnews.in/cm-dhamis-clear-message-traditions-have-their-place-but-knowledge-science-technology-innovation-and-ai-must-be-embraced/ https://ctnews.in/cm-dhamis-clear-message-traditions-have-their-place-but-knowledge-science-technology-innovation-and-ai-must-be-embraced/#respond Thu, 03 Sep 2026 02:21:23 +0000 https://ctnews.in/?p=69794

  • 26 मदरसों को मुख्यमंत्री धामी ने प्रदान किए मान्यता प्रमाण-पत्र
  • “आधुनिक शिक्षा से ही बच्चों का भविष्य बनेगा उज्ज्वल”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज आईआरडीटी सभागार, देहरादून में उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा आयोजित अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान मान्यता प्रमाण-पत्र वितरण समारोह में  प्रदेश के 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों (मदरसों) को मान्यता प्रमाण-पत्र प्रदान किए। कार्यक्रम की थीम “नई पहचान, नया सम्मान। आधुनिक शिक्षा से उज्ज्वल भविष्य” रही।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण द्वारा 26 शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रदान किया जाना अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक शुरुआत है। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नवाचार किए जा रहे हैं और यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने मान्यता प्राप्त करने वाले सभी संस्थानों के प्रतिनिधियों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करना समाज और राष्ट्र के भविष्य निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में प्राधिकरण बनाए जाने के पीछे मूल उद्देश्य यही है कि सभी बच्चे आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़ें और उन्हें अपने व्यक्तित्व तथा भविष्य के निर्माण के लिए पर्याप्त अवसर प्राप्त हों। उन्होंने कहा कि परंपराओं का अपना महत्व है, लेकिन वर्तमान समय ज्ञान-विज्ञान, साइंस, टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का समय है। पूरी दुनिया तेजी से बदल रही है और प्रत्येक देश विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है। ऐसे में बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना समय की आवश्यकता है, ताकि वे बदलती दुनिया की चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को तैयार कर सकें।

उन्होंने कहा कि बच्चों को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए, जिससे उनका व्यक्तित्व विकसित हो, उनकी प्रतिभा सामने आए और वे अपने भविष्य का निर्माण कर सकें। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से कोई बच्चा डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, लेखक या वैज्ञानिक बन सकता है। कृषि के क्षेत्र में जाने वाले बच्चे आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाएं। आज प्रत्येक क्षेत्र में शोध और नवाचार हो रहा है, इसलिए बच्चों को नई तकनीकों और शोध को समझने, सीखने तथा उसे व्यवहार में उतारने की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने कहा कि आज केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों को व्यावहारिक, आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा देना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की नीतियों और निर्णयों का उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा वर्ग को टारगेट करना नहीं है। उन्होंने समान नागरिक संहिता का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि UCC किसी वर्ग को निशाना बनाने के लिए लागू नहीं किया गया है और इसी प्रकार अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण भी किसी वर्ग को टारगेट करने के लिए नहीं बनाया गया है। सरकार का उद्देश्य सभी वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराना और प्रत्येक बच्चे को आगे बढ़ने का अवसर देना है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में सभी वर्गों के बीच आपसी प्रेम, भाईचारा और मधुर संबंध हैं तथा किसी व्यक्ति के साथ केवल उसकी पहचान या वर्ग के आधार पर भेदभाव करने की नीति नहीं है। सरकार व्यक्ति के कार्य और उसके योगदान को महत्व देती है।

मुख्यमंत्री ने सरकारी भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हुआ है, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी गरीब व्यक्ति को परेशान करना सरकार का उद्देश्य नहीं है। यदि किसी व्यक्ति के पास विधिवत खरीदी गई जमीन, वैध दस्तावेज, रजिस्ट्री और स्वीकृत मानचित्र है तो उसे परेशान करने का कोई उद्देश्य नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार समाज के सभी वर्गों को हुनर और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है। युवाओं को ऋण एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और बेटियों को भी आगे बढ़ने के अवसर दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसे लोगों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी हैं, जिन्होंने कभी कल्पना नहीं की होगी कि उन्हें इतनी महत्वपूर्ण भूमिका मिलेगी। उन्होंने प्राधिकरण की उपाध्यक्ष फरजाना का उल्लेख करते हुए कहा कि काम करने और अपनी क्षमता साबित करने वाले लोगों को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शायद उन्होंने भी कभी नहीं सोचा होगा कि उन्हें इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि यही सरकार के कार्य करने की शैली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समान नागरिक संहिता को लेकर भी समाज में सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई मुस्लिम देशों में भी UCC लागू है और यदि यह व्यवस्था खराब होती तो अनेक देश इसे स्वीकार नहीं करते। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक समाज के कुछ वर्गों को आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर नहीं मिले और उन्हें अच्छी शिक्षा से वंचित रखा गया। लोगों के मन में भय पैदा किया गया कि यदि ये लोग आगे बढ़ेंगे तो पता नहीं क्या होगा। अब इस सोच को बदलने और शिक्षा तथा विकास के माध्यम से समाज को आगे ले जाने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक बिना किसी भेदभाव के पहुंच रहा है। गरीबों को राशन, स्वास्थ्य सुविधाएं, पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर और गैस कनेक्शन जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन योजनाओं का लाभ देते समय लाभार्थी की जाति, वर्ग या समुदाय नहीं देखा जाता, बल्कि पात्रता को आधार बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि इसी भावना के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी सभी बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में एक नई व्यवस्था की शुरुआत हुई है और इसे मजबूत करने की जिम्मेदारी सरकार तथा शिक्षण संस्थानों दोनों की है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए आपसी सहयोग और विश्वास आवश्यक है। सरकार अपनी ओर से सहयोग करेगी और शिक्षण संस्थानों को भी सकारात्मक भूमिका निभाते हुए इस व्यवस्था को मजबूत करना होगा।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा को बच्चों के भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण आधारशिला बताते हुए कहा कि बच्चों को अच्छी शिक्षा देना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यही शिक्षा उनके भविष्य का निर्माण करेगी और जीवनभर उनके काम आएगी। उन्होंने कहा कि समय निरंतर बदल रहा है और समय के साथ शिक्षा तथा कार्य करने के तरीकों में भी बदलाव आवश्यक है। उन्होंने कृषि का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले खेतों में हल के माध्यम से काम किया जाता था, जबकि आज आधुनिक मशीनों और तकनीकों ने कृषि को काफी आसान और प्रभावी बना दिया है।

मुख्यमंत्री ने अपने किसान परिवार से होने का उल्लेख करते हुए कहा कि वह स्वयं समय-समय पर खेत में जाकर कृषि कार्य करते हैं और आधुनिक कृषि उपकरणों के साथ-साथ पारंपरिक तरीके से भी काम करने में उन्हें कोई संकोच नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि आधुनिक ज्ञान-विज्ञान जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उसे अपनाना भी आवश्यक है। इसी प्रकार शिक्षा में भी आधुनिक तकनीक और नए ज्ञान को स्वीकार करना समय की मांग है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज 14-15 वर्ष की उम्र के बच्चे ऐसी तकनीकी और डिजिटल जानकारी रखते हैं, जिनके बारे में कई बार बड़े लोग भी नहीं जानते। नई पीढ़ी की क्षमताओं को स्वीकार करते हुए उन्हें सही दिशा और अच्छे संस्कार देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे के भीतर प्रतिभा, योग्यता और क्षमता होती है और समाज तथा शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी है कि उन क्षमताओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करें।

मुख्यमंत्री ने बच्चों की बात सुनने और उनकी भावनाओं को समझने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चे हमारे अपने हैं और उनके भविष्य को बेहतर बनाना सभी की जिम्मेदारी है। बच्चों को अच्छे संस्कार देने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा और क्षमताओं को विकसित करने के लिए सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को ऐसी सोच से बाहर निकलना होगा जिसमें लोगों से केवल राजनीतिक समर्थन, नारे या किसी विशेष उद्देश्य के लिए इस्तेमाल होने की अपेक्षा की जाती रही हो, जबकि उनके शिक्षा और भविष्य की चिंता नहीं की जाती थी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इस सोच में बदलाव लाया जाए और बच्चों के भविष्य को केंद्र में रखते हुए शिक्षा तथा विकास को प्राथमिकता दी जाए।

मुख्यमंत्री ने शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाले लोगों को समाज का महत्वपूर्ण वर्ग बताते हुए कहा कि व्यापार, उद्योग और अन्य व्यवसाय अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में काम करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि शिक्षक और शिक्षण संस्थान बच्चों के भविष्य का निर्माण करते हैं। उनके माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को दिशा मिलती है और समाज का भविष्य तैयार होता है।

मुख्यमंत्री ने मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों से अपेक्षा की कि उनके माध्यम से आधुनिक शिक्षा का संदेश गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि आज जो शुरुआत हुई है, उसका वास्तविक परिणाम आने वाले समय में बच्चों की शिक्षा, उनकी प्रतिभा और उनके भविष्य में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार और विभाग द्वारा बच्चों के भविष्य के लिए नियम-कानून एवं व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं, इसलिए शिक्षण संस्थानों को भी पूरी जिम्मेदारी के साथ इस विश्वास को मजबूत करना होगा। केवल औपचारिकता पूरी करने के बजाय धरातल पर वास्तविक परिवर्तन दिखाई देना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड आज विभिन्न क्षेत्रों में देश के सामने उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। राज्य में किए जा रहे अनेक नवाचार और बनाए जा रहे नियम-कानून अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं। उन्होंने अपेक्षा की कि अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में आज शुरू हुई यह पहल भी आगे चलकर देश के लिए एक उदाहरण बने और उत्तराखंड को इस क्षेत्र में नई पहचान दिलाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की विशेषता आपसी भाईचारा और मिल-जुलकर रहने की रही है। यहां लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में खड़े होते हैं और सामाजिक सौहार्द की भावना के साथ आगे बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में शुरू हुई यह पहल केवल भाषणों और बातों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका प्रभाव शिक्षण संस्थानों के कामकाज, बच्चों की शिक्षा और उनके भविष्य में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से विश्वास का वातावरण बनाया गया है और अब शिक्षण संस्थानों तथा समाज की ओर से भी इस विश्वास को मजबूत करने की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री ने सभी मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों, उनके संचालकों, शिक्षकों एवं प्रतिनिधियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण, व्यावहारिक एवं रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करें, जिससे उनका व्यक्तित्व विकसित हो, उनकी प्रतिभा निखरे और वे भविष्य की चुनौतियों का मजबूती से सामना करते हुए प्रदेश और देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने देहरादून जनपद के मदरसा जामिया इस्लामिया, जूनियर हाईस्कूल, डॉटरगंज, विकासनगर; जामिया दारूल उलूम रमजानिया, ढकरानी, विकासनगर; जामिया सबीलुर्रशाद, जूनियर हाईस्कूल, उस्मानपुर, ढ़ाकी, सहसपुर; जामिया सय्यिदा फातिमातुज्जाहरा, जूनियर हाईस्कूल, ग्राम एवं पोस्ट-सहसपुर (जोल बस्ती); जामिया रहीमिया प्राईमरी स्कूल, जाटोवाला, पोस्ट-सभावाला, विकासनगर तथा मदरसा अरबिया तालीमुल कुरआन, प्राथमिक विद्यालय, लक्खनवाला, विकासनगर को मान्यता प्रमाण-पत्र प्रदान किए।

मुख्यमंत्री श्री धामी ने हरिद्वार जनपद के मदरसा इमामिया, पठानपुरा; मदरसा अरबिया रहमानिया, हाईस्कूल, रुड़की; पैरामाउन्ट कॉन्वेन्ट, हाईस्कूल, सुल्तानपुर, लक्सर; गोल्डन फ्युचर, जूनियर हाई स्कूल, ग्राम-छापुर शेरपुर, अफगानपुर; मदरसा तमन्ना-ए-तालीम, सुल्तानपुर आदमपुर, ब्लॉक लक्सर; मदरसा गुलशन-ए-तालीम, ग्राम-नेहन्दपुर सुठारी, पोस्ट-सुल्तानपुर, ब्लॉक लक्सर; मदरसा जन्नतुन निशा, जूनियर हाई स्कूल, नगर पंचायत सुल्तानपुर आदमपुर, लक्सर; मदरसा नुर साबरी, जूनियर हाईस्कूल, सुल्तानपुर आदमपुर, लक्सर; मदरसा के. जी. एन. पब्लिक स्कूल, ग्राम जसौदरपुर, ब्लॉक बहादराबाद; मदरसा रशीदिया, जूनियर हाई स्कूल, मोहम्मदपुर कुन्हारी, ब्लॉक बहादराबाद; एम. टी. यू. जूनियर हाईस्कूल, नगर पंचायत-सुल्तानपुर आदमपुर, ब्लॉक-लक्सर; मदरसा बहार-ए-चमन, जूनियर हाई स्कूल, ग्राम एवं पोस्ट-तिलकपुरी भोगपुर, ब्लॉक-लक्सर; एम. आई. टी., जूनियर हाईस्कूल, नगर पंचायत-सुल्तानपुर आदमपुर, ब्लॉक-लक्सर; मदरसा तालीम-ए-जदीद, जूनियर हाईस्कूल, ग्राम-जसौदरपुर, पोस्ट-सुल्तानपुर आदमपुर, ब्लॉक-बहादराबाद, तहसील एवं जिला हरिद्वार; मॉर्डन आदर्श पब्लिक, जूनियर हाई स्कूल, ग्राम-सिकरौढ़ा, विकासखण्ड भगवानपुर; मदरसा फैज-ए-हिदायत, ग्राम एवं पोस्ट-सुल्तानपुर आदमपुर, ब्लॉक-लक्सर; आरजू पब्लिक जूनियर हाईस्कूल, ग्राम-सलेमपुर महदूद, विकासखण्ड बहादराबाद; ड्रीम पैराडाइज पब्लिक जूनियर हाईस्कूल, ग्राम-धीरमजरा, डाक-हल्लूमजरा, ब्लॉक एवं तहसील-भगवानपुर तथा राव असगर अली मैमोरियल, पब्लिक जूनियर हाई स्कूल, ग्राम एवं पोस्ट-खेड़ीशिकोहपुर, भगवानपुर को मान्यता प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री श्री धामी ने ऊधमसिंहनगर जनपद के एम. जी. एन. पब्लिक स्कूल, केलाखेड़ा को भी नवीन मान्यता प्रदान की गई। इस प्रकार प्रदेश के कुल 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।

कार्यक्रम में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मंत्री श्री खजान दास, उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, अपर सचिव श्री विक्रम सिंह यादव सहित विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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मुख्य सचिव ने की प्रदेश में रोपवे परियोजनाओं की समीक्षा, रोपवे परियोजनाओं में तेजी लाने के दिए निर्देश https://ctnews.in/chief-secretary-reviews-ropeway-projects-in-the-state-issues-directives-to-expedite-them/ https://ctnews.in/chief-secretary-reviews-ropeway-projects-in-the-state-issues-directives-to-expedite-them/#respond Thu, 03 Sep 2026 02:15:27 +0000 https://ctnews.in/?p=69791

  • रोपवे परियोजनाओं के लिए रोपवे रेग्यूलेषन और रूल्स शीघ्र हों जारीः मुख्य सचिव

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बुधवार को प्रदेश में संचालित एवं प्रस्तावित विभिन्न रोपवे परियोजनाओं की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने ब्रिडकुल को प्रदेश में रोपवे परियोजनाओं के प्रभावी संचालन एवं नियमन के लिए रोपवे रेग्यूलेषन और रूल्स शीघ्र जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं में तेजी लाते हुए लंबित प्रक्रियाओं, भूमि संबंधी प्रकरणों एवं आपसी समन्वय से जुड़े विषयों को प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में रोपवे कनेक्टिविटी प्रदेश की पर्यटन एवं यातायात व्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इसलिए सभी परियोजनाओं में समयबद्धता, गुणवत्ता एवं आपसी समन्वय पर विशेष ध्यान देते हुए उन्हें धरातल पर उतारने की दिशा में तेजी से कार्य किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि रोपवे परियोजनाओं में पार्किंग डेवलपमेंट को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए, ताकि पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों को बेहतर यातायात सुविधा उपलब्ध हो सके।

मुख्य सचिव ने केदारनाथधाम एवं हेमकुंड साहिब रोपवे की प्रगति की समीक्षा करते हुए सम्बन्धित एजेंसियों को परियोजना की आगामी कार्यवाही में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने जिला प्रशासन एवं कार्यदायी संस्था के बीच बेहतर समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नामित करने के निर्देश भी दिए गए। नैनीताल क्षेत्र की रोपवे परियोजनाओं की समीक्षा के दौरान उन्होंने रानीबाग-ज्योलीकोट-हनुमानगढ़ी-कैंचीधाम तथा रानीबाग-भीमताल-भवाली रोपवे परियोजनाओं में एनएचएलएमएल एवं यूकेएमआरसी को आपसी तालमेल से इंटीग्रेशन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने यूकेएमआरसी के प्रोजेक्ट के फाइनल अप्रूवल की प्रक्रिया भी शीघ्र पूरी करने के साथ ही फाईनल डीपीआर तथा डीएफसी की प्रक्रिया को भी शीघ्र पूर्ण किए जाने के निर्देष दिए।

मुख्य सचिव ने पर्यटन विभाग द्वारा निर्माण की जा रही परियोजनाओं जोशीमठ-औली-गोरसों, रैथल-बारसू तथा पुरकुल रोपवे परियोजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने इन परियोजनाओं की नियमित एवं प्रभावी समीक्षा करते हुए आवश्यक प्रक्रियाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने यमुनोत्री-जानकी चट्टी, हनुमानचट्टी-पूर्णागिरि एवं तपोवन-कुंजपुरा रोपवे परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने इनसे सम्बन्धित लम्बित कार्यों को शीघ्र पूरा करने को कहा गया। उन्होंने कहा कि भूमि सम्बन्धी विषयों का समाधान कर परियोजनाओं की आगे की कार्यवाही में किसी प्रकार का विलम्ब न हो यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

इस अवसर पर सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, अपर सचिव विनीत कुमार सहित एनएचएलएमएल एवं यूकेएमआरसी के अधिकारी एवं सम्बन्धित जनपदों से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

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मसूरी गोलीकांड के शहीद राज्य आंदोलनकारियों का बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी https://ctnews.in/the-sacrifice-of-the-statehood-agitators-martyred-in-the-mussoorie-firing-incident-will-always-be-remembered-chief-minister-pushkar-singh-dhami/ https://ctnews.in/the-sacrifice-of-the-statehood-agitators-martyred-in-the-mussoorie-firing-incident-will-always-be-remembered-chief-minister-pushkar-singh-dhami/#respond Thu, 03 Sep 2026 02:10:05 +0000 https://ctnews.in/?p=69788

  • राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष, तप, त्याग और बलिदान से साकार हुआ उत्तराखंड राज्य गठन का सपना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को शहीद स्थल झूलाघर, मसूरी में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान शहीद राज्य आंदोलनकारियों की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित किया।

मुख्यमंत्री ने मसूरी गोलीकांड में शहीद राज्य आंदोलनकारियों को नमन करते हुए कहा कि राज्य आंदोलनकारियों ने अपने संघर्ष, तप, त्याग और बलिदान से उत्तराखंड राज्य गठन के सपने को साकार किया है। उन्होंने कहा कि मसूरी की धरती उत्तराखंड के संघर्ष और बलिदान की साक्षी है। वर्ष 1994 में मसूरी में हजारों राज्य आंदोलनकारी खटीमा गोलीकांड के विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी आंखों में आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य का सपना था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद आंदोलनकारियों का बलिदान प्रत्येक उत्तराखंडवासी की स्मृतियों में सदैव अमर रहेगा। उन्होंने अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि हम इन बलिदानों को कभी नहीं भूलेंगे। नई पीढ़ी को भी राज्य निर्माण के संघर्ष से परिचित कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन में मातृशक्ति ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हमारी माताओं-बहनों ने अपने संघर्ष और सहभागिता से आंदोलन को मजबूती प्रदान की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलनकारी उत्तराखंड की पहचान और गौरव के आधार हैं। राज्य सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान और कल्याण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जा रहा है। इसका दायरा बढ़ाते हुए चिह्नित आंदोलनकारियों की परित्यक्ता, विधवा और तलाकशुदा पुत्रियों को भी इसमें शामिल किया गया है। राज्य आंदोलनकारियों को पहचान पत्र जारी करने के साथ ही 98 आंदोलनकारियों को राजकीय सेवा में सेवायोजित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद राज्य आंदोलनकारियों के परिवारों की मासिक पेंशन ₹3 हजार से बढ़ाकर ₹5,500 की गई है। जेल गए और घायल आंदोलनकारियों की पेंशन ₹6 हजार से बढ़ाकर ₹7 हजार तथा सक्रिय आंदोलनकारियों की पेंशन ₹4,500 से बढ़ाकर ₹5,500 प्रतिमाह की गई है। पूर्णतः शय्याग्रस्त दिव्यांग राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन भी ₹20 हजार से बढ़ाकर ₹30 हजार प्रतिमाह की गई है। राज्य आंदोलनकारियों के अधिकतम दो बच्चों को स्कूल और कॉलेज में निःशुल्क शिक्षा तथा आंदोलनकारियों को उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा भी दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश की महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने, देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता लागू करने, सख्त नकल विरोधी कानून और कठोर भू-कानून लागू करने जैसे ऐतिहासिक कार्य किए हैं। बीते पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरियां प्रदान की गई हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की अस्मिता और डेमोग्राफी की रक्षा के लिए धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानून भी लागू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि देवभूमि की शांति और संस्कृति के खिलाफ काम करने वाली हर मानसिकता पर सख्ती से कार्रवाई की गई है और आगे भी की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है। राज्य के सीमांत क्षेत्रों तक सड़क, रेल, रोपवे और हवाई कनेक्टिविटी का तेजी से विस्तार हुआ है। राज्य में चारधाम यात्रा और धार्मिक पर्यटन को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा गया है। युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर ही रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट ध्येय है कि उत्तराखंड का कोई भी युवा रोजगार के लिए पलायन करने को मजबूर न हो, कोई भी गांव विकास से वंचित न रहे तथा देवभूमि की अस्मिता सदैव सुरक्षित और समृद्ध बनी रहे। उन्होंने कहा कि हमारा विकल्प रहित संकल्प है कि राज्य के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचे, हर गांव आत्मनिर्भर और समृद्ध बने, हर हाथ को काम और हर युवा को रोजगार मिले।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला, नगर पालिका अध्यक्ष मसूरी श्रीमती मीरा सकलानी, रविन्द्र जुगरान, जिलाधिकारी देहरादून श्री आशीष चौहान सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

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बनबसा में प्रबुद्धजनों से मिले सीएम धामी, विकास योजनाओं और ‘आदर्श उत्तराखंड’ पर की चर्चा https://ctnews.in/cm-dhami-met-with-prominent-citizens-in-banbasa-discussed-development-schemes-and-adarsh-uttarakhand/ https://ctnews.in/cm-dhami-met-with-prominent-citizens-in-banbasa-discussed-development-schemes-and-adarsh-uttarakhand/#respond Tue, 01 Sep 2026 04:28:27 +0000 https://ctnews.in/?p=69784

बोले मुख्यमंत्री- ‘आदर्श चम्पावत’ के संकल्प के साथ ‘आदर्श उत्तराखंड’ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही सरकार

बनबसा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को बनबसा में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम के बाद प्रबुद्धजनों से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र के विकास, पर्यटन, तीर्थाटन, रोजगार और विभिन्न महत्वपूर्ण परियोजनाओं को लेकर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज को दिशा देने में प्रबुद्धजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है और उनके सुझाव सरकार के लिए मार्गदर्शक का काम करते हैं।

मुख्यमंत्री ने प्रबुद्धजनों का स्वागत करते हुए कहा कि प्रबुद्धजन समाज के दर्पण होते हैं। उनके विचार और चिंतन समाज को नई दिशा देने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रबुद्धजनों से मिलने वाले सुझाव, ऊर्जा और आशीर्वाद से विकास कार्यों को नई गति मिलती है।

‘आदर्श चम्पावत’ के साथ ‘आदर्श उत्तराखंड’ का संकल्प

मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘आदर्श चम्पावत’ बनाने के संकल्प के साथ ही ‘आदर्श उत्तराखंड’ के निर्माण की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाने का अभियान जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि टनकपुर में आईएसबीटी और शारदा कॉरिडोर जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के पूरा होने से पर्यटन, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

पूर्णागिरि धाम के विकास पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि मां पूर्णागिरि धाम को वर्षभर श्रद्धालुओं के लिए सुगम बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। ककराली गेट से पूर्णागिरि धाम तक स्थायी प्रकाश व्यवस्था के साथ रोपवे और हेलीपैड के विकास पर भी कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा के दृष्टिगत टनकपुर पर्यटन और तीर्थाटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है।

साइंस सेंटर समेत कई परियोजनाओं को मिल रही गति

मुख्यमंत्री ने कहा कि चम्पावत जिले में पार्किंग, एपीजे अब्दुल कलाम संस्थान, अत्याधुनिक साइंस सेंटर सहित विभिन्न विकास परियोजनाओं को गति दी जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड सतत विकास, कानून-व्यवस्था, निवेश और पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में राज्य की जीएसडीपी दोगुनी हुई है और पर्यटन के क्षेत्र में भी उत्तराखंड ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कर्तव्य पथ पर मानसखंड की झांकी को प्रथम स्थान मिलने को राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का गौरव बताया।

प्रबुद्धजनों ने विकास कार्यों के लिए जताया आभार

कार्यक्रम में प्रबुद्धजन बंशीधर उपाध्याय ने मुख्यमंत्री द्वारा व्यस्त कार्यक्रम के बीच समय निकालकर संवाद करने के लिए आभार व्यक्त किया। पूर्व सैनिक पुष्कर कापड़ी, पूर्व कैप्टन भानी चंद और अर्जुन सिंह ने भी अपने विचार रखे।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में चम्पावत सहित पूरा उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने खेल, पर्यटन, मंदिरों के सौंदर्यीकरण, महिला सशक्तिकरण, साइंस सेंटर, टनकपुर में रेल सुविधाओं, शारदा कॉरिडोर और आईएसबीटी जैसी परियोजनाओं के लिए मुख्यमंत्री का आभार जताया।

दिव्यांग पूर्व ग्राम प्रधान कमला देवी से मिलने खुद पहुंचे मुख्यमंत्री

कार्यक्रम के दौरान बनबसा की प्रथम महिला ग्राम प्रधान एवं दिव्यांग कमला देवी मुख्यमंत्री का स्वागत करने के लिए आगे आने का प्रयास कर रही थीं। उन्हें देखकर मुख्यमंत्री स्वयं उनके पास पहुंचे और पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।

मुख्यमंत्री के इस आत्मीय व्यवहार ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया और यह क्षण कार्यक्रम में चर्चा का विषय बना रहा।

कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष गोविन्द सामंत, जिला महामंत्री मुकेश कलखुड़िया, दायित्वधारी श्याम नारायण पाण्डेय, मुकेश महराना, सुभाष बगौली, मनोज कालाकोटी, हेमा जोशी एवं किरण देवी, विधायक प्रतिनिधि चम्पावत प्रकाश तिवारी, विधायक प्रतिनिधि टनकपुर दीपक रजवार, प्रदेश मंत्री भाजपा निर्मल माहरा, वरिष्ठ भाजपा नेता सतीश पाण्डेय, नोडल अधिकारी मुख्यमंत्री केदार सिंह बृजवाल सहित अन्य प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।

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ड्रग फ्री उत्तराखंड से विकसित भारत-2047 तक, बनबसा में सीएम धामी का युवाओं से संवाद https://ctnews.in/from-drug-free-uttarakhand-to-developed-india-2047-cm-dhamis-conversation-with-youth-in-banbasa/ https://ctnews.in/from-drug-free-uttarakhand-to-developed-india-2047-cm-dhamis-conversation-with-youth-in-banbasa/#respond Tue, 01 Sep 2026 04:12:15 +0000 https://ctnews.in/?p=69781

मुख्यमंत्री बोले- पारदर्शिता, निष्ठा और अनुशासन ही युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी

बनबसा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को सुमंगलम होटल, बनबसा में आयोजित ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं से सीधे संवाद करते हुए उनके सवालों के जवाब दिए और शिक्षा, रोजगार, नशामुक्ति, नकल विरोधी कानून, खेल, विज्ञान एवं तकनीक सहित विभिन्न विषयों पर सरकार की योजनाओं और प्राथमिकताओं की जानकारी दी।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने शिक्षा, खेल, समाज सेवा, स्वरोजगार और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली स्थानीय युवा प्रतिभाओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया।

युवाओं को दिया निष्ठा और अनुशासन का संदेश

छात्रा मिलन कलखुड़िया ने मुख्यमंत्री से उनके जीवन सफर को लेकर सवाल किया। जवाब में मुख्यमंत्री ने अपने बचपन, शिक्षा, युवावस्था और राजनीतिक जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि कोई व्यक्ति जन्म से महान नहीं होता, बल्कि अपने दायित्वों का पूरी जिम्मेदारी और निष्ठा के साथ निर्वहन करते हुए महान बनता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि निष्ठा, परिश्रम और अनुशासन व्यक्ति को सफलता की ओर ले जाते हैं। उन्होंने युवाओं से अपने जीवन में अनुशासन को अपनाने और अपने लक्ष्य के प्रति निरंतर मेहनत करने का आह्वान किया।

टनकपुर में परीक्षा केंद्र के लिए उचित प्रयास का आश्वासन

छात्रा प्रीति पांडे ने नकल विरोधी कानून की सराहना करते हुए स्थानीय स्तर पर परीक्षा केंद्र टनकपुर में बनाए जाने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि टनकपुर में परीक्षा केंद्र स्थापित करने के लिए उचित प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने कहा कि राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून लागू होने से प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ी है। अब तक 34 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।

‘ड्रग फ्री उत्तराखंड’ के लिए युवाओं से सहयोग की अपील

छात्र रोहित शर्मा के नशे से संबंधित सवाल पर मुख्यमंत्री ने ‘ड्रग फ्री उत्तराखंड’ अभियान का उल्लेख करते हुए युवाओं से नशे से दूर रहने और अपने साथियों एवं समाज के अन्य लोगों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में युवा शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है। स्वस्थ और नशामुक्त युवा ही मजबूत उत्तराखंड और विकसित भारत की नींव रख सकते हैं।

चंपावत में बनेगा अत्याधुनिक साइंस सेंटर

छात्र सुमित सिंह नायक के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि चंपावत में करीब 56 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक साइंस सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है। इससे क्षेत्र के युवाओं और विद्यार्थियों को विज्ञान एवं तकनीक से जुड़ी नई जानकारी और आधुनिक संसाधन उपलब्ध होंगे।

उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। चंपावत में आधुनिक पुस्तकालय, राजकीय पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग कॉलेज, साइंस सेंटर और राज्य के पहले बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज जैसी सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है।

युवा आयोग युवाओं को देगा नई दिशा

छात्र नमन पुरी के युवा आयोग से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में युवा आयोग का गठन किया जा रहा है। यह आयोग प्रदेश की युवा प्रतिभाओं को उचित मार्गदर्शन, रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड में पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए अल्मोड़ा, चमोली और पौड़ी जैसे जिलों में औद्योगिक पार्क स्थापित किए जा रहे हैं।

युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की करीब 65 प्रतिशत आबादी युवा है और यही युवा शक्ति 21वीं सदी में भारत की सबसे बड़ी ताकत है। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सही दिशा और मार्गदर्शन मिलने पर युवा देश का भविष्य बदलने की क्षमता रखते हैं।

उन्होंने युवाओं से अपने ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि उत्तराखंड को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

इन युवा प्रतिभाओं को किया सम्मानित

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली युवा प्रतिभाओं को सम्मानित किया। इनमें NEET परीक्षा में सफल बसटिया की हिमानी विश्वकर्मा, अमेजॉन में 47 लाख रुपये वार्षिक पैकेज हासिल करने वाली बिचई की श्वेता चंद और राष्ट्रीय पैरा आर्म रैसलिंग में स्वर्ण पदक विजेता टनकपुर के पवन गढ़कोटी शामिल रहे।

इसके अलावा खेल एवं दिव्यांग कल्याण में राज्य स्तरीय दक्षता पुरस्कार विजेता बनबसा के संदीप रस्तोगी, निःशुल्क गौ सेवा करने वाले पवन मेहता, नशा मुक्ति अभियान संचालक मनीष सिंह तथा स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहीं अजंता विजय को भी सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने बागवानी के माध्यम से स्वरोजगार स्थापित करने वाले चंपावत के कमल गिरी, माउंट एवरेस्ट विजेता पर्वतारोही वीरेंद्र सिंह सामंत, लोक संस्कृति एवं मीडिया इंफ्लुएंसर तरुण भट्ट तथा युवतियों को सेना एवं पुलिस भर्ती की निःशुल्क ट्रेनिंग देने वाली बनबसा की अरुणिमा रावत को भी उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया।

कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष आनन्द सिंह अधिकारी, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविन्द सामन्त, जिला महामंत्री मुकेश कलखुडिया, प्रभारी गुंजन सुखीजा, सह प्रभारी नितिन देउपा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं पदाधिकारी मौजूद रहे। जिलाधिकारी मनीष कुमार, पुलिस अधीक्षक रेखा यादव सहित जिला प्रशासन के अधिकारी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

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स्थानीय दुकानदारों और नागरिकों से आत्मीय संवाद कर बोले मुख्यमंत्री—स्थानीय उत्पादों और छोटे कारोबारियों को प्रोत्साहन देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी https://ctnews.in/interacting-warmly-with-local-shopkeepers-and-citizens-the-chief-minister-said-promoting-local-products-and-small-businesses-is-a-collective-responsibility-for-us-all/ https://ctnews.in/interacting-warmly-with-local-shopkeepers-and-citizens-the-chief-minister-said-promoting-local-products-and-small-businesses-is-a-collective-responsibility-for-us-all/#respond Tue, 01 Sep 2026 04:02:39 +0000 https://ctnews.in/?p=69778

  • सीएम धामी की सादगी ने दिया ‘लोकल फॉर वोकल’ का संदेश, मेलाघाट रोड पर पैदल चलकर मिलन डेरी में पी चाय

‘लोकल फॉर वोकल’ को केवल अभियान नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का माध्यम मानने वाले मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को खटीमा में अपनी सादगी और सहजता से एक बार फिर लोगों का दिल जीत लिया।

मुख्यमंत्री धामी मेलाघाट रोड पर पैदल चलते हुए अचानक मिलन डेरी पहुंचे और वहां चाय की चुस्की लेकर स्थानीय कारोबारियों का उत्साह बढ़ाया। मुख्यमंत्री को अपने बीच इस तरह सहज भाव से देखकर आसपास मौजूद दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों में भी खासा उत्साह दिखाई दिया।

मिलन डेरी में चाय का आनंद लेते हुए मुख्यमंत्री ने दुकानदारों और वहां मौजूद लोगों से आत्मीयता से बातचीत की और उनके कारोबार तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। मुख्यमंत्री का यह सहज अंदाज स्थानीय छोटे व्यवसायियों के लिए प्रोत्साहन और सम्मान का संदेश लेकर आया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों, स्थानीय दुकानों और छोटे कारोबारियों को बढ़ावा देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। ‘लोकल फॉर वोकल’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की मजबूत नींव है।

उन्होंने कहा कि जब हम अपने आसपास के स्थानीय दुकानदारों, कारीगरों, उद्यमियों और उत्पादों को प्राथमिकता देंगे, तो उसका सीधा लाभ हमारे स्थानीय बाजार और अर्थव्यवस्था को मिलेगा। इससे न केवल छोटे कारोबारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान यहां के स्थानीय उत्पादों, हुनर और उद्यमिता से भी जुड़ी है। सरकार लगातार स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने, स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने और स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री का मेलाघाट रोड पर पैदल चलकर स्थानीय डेरी में चाय पीना इसी भावना का सहज और प्रभावी उदाहरण बना। उनकी इस पहल ने यह संदेश दिया कि स्थानीय को अपनाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी से ही ‘लोकल फॉर वोकल’ का संकल्प मजबूत होगा।

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मुख्य सचिव ने की पुलिस विभाग के कार्यों की समीक्षा, साइबर पुलिसिंग, मानव तस्करी एवं डिजिटल इन्वेस्टीगेशन को मजबूत करने के निर्देश https://ctnews.in/chief-secretary-reviews-police-departments-operations-issues-directives-to-strengthen-cyber-policing-anti-human-trafficking-efforts-and-digital-investigation-capabilities/ https://ctnews.in/chief-secretary-reviews-police-departments-operations-issues-directives-to-strengthen-cyber-policing-anti-human-trafficking-efforts-and-digital-investigation-capabilities/#respond Tue, 01 Sep 2026 03:16:40 +0000 https://ctnews.in/?p=69775

मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय में पुलिस विभाग के कार्यों की समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने विभाग द्वारा की जा रही विभिन्न पहलों की सराहना की। उन्होंने मानव एवं बाल तस्करी की रोकथाम, साइबर अपराधों से निपटने, नारकोटिक्स के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई, इन्वेस्टीगेशन में तकनीक के अधिकाधिक उपयोग तथा डिजिटल पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग के मामलों में मैदानी क्षेत्रों सहित पर्वतीय क्षेत्रों में भी प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग तथा पुलिस विभाग के पोर्टल का शीघ्र इंटीग्रेशन किया जाए तथा एपी आई इंटीग्रेशन के माध्यम से दोनों विभागों के डेटा में किसी प्रकार विसंगति न हो। इसके लिए पुलिस एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के मध्य कॉर्डिनेशन के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती भी शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने लापता बालिकाओं एवं नाबालिग बच्चों को ट्रेस करने के लिए डेडिकेटेड टीम एवं मजबूत मैकेनिज्म विकसित करने तथा अनट्रेस्ड बच्चों एवं महिलाओं के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही विभिन्न विभागों के बीच डेटा शेयरिंग और बेहतर समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने ऑपरेशन स्माइल का नवीनतम डेटा उपलब्ध कराने के निर्देश देते हुए कहा कि मानव एवं बाल तस्करी के मामलों का केस-वाइज विश्लेषण किया जाए। तस्करी के नेटवर्क एवं संगठित मामलों की पहचान कर उनकी रोकथाम के लिए प्रभावी एवं मजबूत तंत्र विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि पीड़ितों का रेस्क्यू करने के बाद उनकी रिहैबिलिटेशन पर भी विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है। अन्य राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए पीड़ितों को उनके अभिभावकों को सुरक्षित रूप से सौंपे जाने तक प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने रेस्क्यू मैकेनिज्म को और मजबूत करने तथा जिला स्तर पर डेडिकेटेड टीम एवं व्यवस्थाएं विकसित करने के निर्देश दिए।

साइबर पुलिसिंग को मजबूत करने पर जोर

साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती को देखते हुए मुख्य सचिव ने साइबर पुलिसिंग की मैनपावर को मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने साइबर एक्सपर्ट्स के साथ-साथ बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी व्यवस्था से जोड़ने की आवश्यकता बताई, ताकि साइबर अपराधों के मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

मुख्य सचिव ने एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के अंतर्गत प्रभावी कार्रवाई के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने NCORD की बैठक में इस सम्बन्ध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण किए जाने को कहा।

इन्वेस्टीगेशन में तकनीक का अधिकाधिक उपयोग

मुख्य सचिव ने कहा कि पुलिस इन्वेस्टीगेशन में टेक्नोलॉजी के उपयोग को बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने विवेचना अधिकारियों को आवश्यक इन्वेस्टीगेशन किट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि विवेचना की गुणवत्ता और प्रभावशीलता में सुधार हो सके। उन्होंने कहा कि ऐसे थानों जहाँ अधिकतर एफ़आईआर दर्ज होती हैं, उन थानों में इन्वेस्टीगेशन विंग खोली जा सकती है। उन्होंने e-FIR के रिजेक्शन का विश्लेषण एवं क्रॉस-वेरिफिकेशन करने के निर्देश भी दिए। साथ ही न्यायश्रुति, FSL, मालखाना एवं Dial 112 को शीघ्र लाइव करने तथा e-Summons के अधिकाधिक उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने ICJS 2.0 साइट्स पर नेटवर्क कनेक्टिविटी की स्थिति की समीक्षा करते हुए कमजोर कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों में नेटवर्क एवं बैंडविड्थ बढ़ाने के निर्देश दिए, ताकि डिजिटल पुलिसिंग की व्यवस्थाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, तकनीक आधारित और जनोन्मुख बनाने के लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय, डेटा शेयरिंग, आधुनिक तकनीक का उपयोग और जिला स्तर पर मजबूत मैकेनिज्म विकसित किया जाना आवश्यक है।

मुख्य सचिव ने कहा कि थानों का अधिकतम स्पेस सीज गाड़ियों से भरा रहता है। इससे थानों स्पेस की कमी की समस्याएं आ रही हैं, जिससे थानों को अधिक उपयोगी और प्रभावशाली बनाने ने भी समस्या आ रही है। उन्होंने थानों में सीज गाड़ियों को डिस्पोज ऑफ़ करने के लिए डिजिटल स्टोरेज पर जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इससे थानों में स्पेस की समस्या को खत्म किया जा सकेगा। उन्होंने जनपदों को भी कैम्पेन मोड पर डिस्पोज कराते हुए इसकी मंथली रिपोर्ट दिए जाने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, सचिव गृह शैलेश बगौली, एडीजी डॉ. वी. मुरुगेशन, आईजी डॉ. निलेश आनंद भरणे, आईजी सुनील कुमार मीणा, एसएसपी श्रीमती तृप्ति भट्ट एवं श्री अजय सिंह उपस्थित थे।

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