उत्तराखंड

डयूटी में तैनात पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला करने वाले पांच बदमाशों को पुलिस ने किया गिरफ्तार, दो बदमाश अभी फरार

हरिद्वार।  

बीती 26 मई को शिवालिक नगर में रात्रि गश्त कर रहे चेतक डयूटी में तैनात पुलिसकर्मियों पर जानलेवा हमला करने वाले पांच बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दो बदमाश अभी फरार हैं। पकड़े गए बदमाश मध्य प्रदेश व आगरा के रहने वाले हैं। पुलिस ने गिरफ्तार बदमाशों के कब्जे से नकदी व जेवरात भी बरामद किए हैं। पत्रकारों को जानकारी देते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डा.योगेंद्र सिंह रावत ने बताया कि ़26 मई की रात चेतक ड्यूटी में तैनात कांस्टेबल विजयपाल व प्रीतपाल शिवालिक नगर में गश्त पर थे। गश्त के दौरान पुलिसकर्मियों को कालोनी में कुछ बदमाश दिखाई दिए। जिनमें से एक को पुलिसकर्मियों ने पकड़ लिया। पुलिसकर्मी बदमाश को अपने साथ ले जाने लगे तो अन्य बदमाशों ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया और अपने साथी को लेकर फरार हो गए। पूरी घटना कालोनी में लगे सीसीटीवी में कैद हुई थी। हमले में कांस्टेबल प्रीतपाल की आंख में गंभीर चोट आने पर उसे उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया। कांस्टेबल प्रीतपाल की आंख में लगी चोट इतनी गंभीर थी कि चिकित्सकों को उसकी आंख निकालनी पड़ी।

पुलिसकर्मियों पर बदमाशों के दुस्साहसिक हमले को पुलिस के लिए चुनौती मानते हुए रानीपुर कोतवाली सहित कई थानों की पुलिस एवं सीआईयू की संयुक्त टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम की जांच पड़ताल में सामने आया कि बदमाश खानाबदोश पारदी जाति के कुख्यात गैंग से हैं और पूरे देश में चोरी की घटनाओं को अंजाम देते हैं। सीसीटीवी फुटेज के अन्वेषण से पता चला कि बदमाशों ने सरस्वती विद्या मंदिर, कनखल व सिडकुल थाना क्षेत्र में भी चोरी की कई घटनाओं को अंजाम दिया है। बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए उन पर  25-25 हजार रूपए का ईनाम भी घोषित किया गया। एसएसपी ने बताया कि पुंलिस टीम द्वारा दिल्ली, मध्यप्रदेश, गुजरात आदि में बदमाशों के संबंध में की गयी पड़ताल में सामने आया कि गैंग से जुड़े सदस्य हरिद्वार में भी अक्सर मेलो में अपराध करने की नीयत से आते जाते रहते है और घाटों, पार्किंग, सडक किनारे आदि स्थानो पर अस्थायी रूप से तम्बू लगाकर रहते है और अपराध करने के बाद ठिकाना छोड़ कर चले जाते हैं। बदमाशों की धरपकड़ के प्रयासों में जुटी पुलिस टीम ने पुष्ट सूचना के आधार पर गैंग के 5 सदस्यों को पन्तद्वीप पार्किंग के पास से देर रात गिरफ्तार कर लिया। बदमाशों से पूछताछ में 6 घटनाओं  जिनमें शिवालिक नगर में पुलिस टीम पर हमला, सरस्वती विद्या मन्दिर, कनखल थाना में अधिवक्ता के घर हुई लाखो की चोरी व कनखल में ही चोरी की दो अन्य वारदातों के साथ- साथ थाना सिडकुल क्षेत्र में चोरी की घटना का खुलासा हुआ। गैंग के 2 सदस्य अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर से हैं। जिनके सम्बन्ध में पुलिस टीम को महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। उन्हें भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। बदमाश पूरे देश में आपराधिक घटनाओं को अंजाम देते हैं। बदमाशों के सामने आए आपराधिक इतिहास के अतिरिक्त उनके द्वारा की गयी अन्य घटनाओं की भी जानकारी जुटाई जा रही है।

एसएसपी डा.योगेंद्र सिंह रावत ने बताया कि बदमाश पारदी जनजाति के खानाबदोश लोग है जिनका कोई स्थाई ठिकाना नहीं है। ये मूलतः मध्य प्रदेश के उज्जैन, गुना, ग्वालियर व मंदसौर के आस पास के रहने वाले है। इनका अपराध करने का अपना एक अलग ही तरीका होता है। ये लोग अपने परिवार की औरतो व बच्चो के साथ अलग-2 राज्यों में बड़े-बड़े धार्मिक स्थलो. रेलवे स्टेशनो व बस अड्डों के आस पास अस्थाई रूप से रहना शुरू करते है तथा दिखावे की खातिर दिन के समय बच्चो के खिलौने व गुब्बारे आदि बेचने का काम करते है। इसी दौरान दिन के समय में पॉश कॉलोनियों जाकर रैकी कर अधिकांश ऐसे घरो को टारगेट कर चोरी की घटनाओ को अन्जाम देते हैं, जो बन्द हो या जिनमे कोई बुजुर्ग दम्पति रहते हो। घटना के समय ये लोग पिठ्ठु बैग अपने साथ में लेकर चलते है। जिसमे पाना, रिन्च, गुलेल तथा कपड़े आदि रखते हैं।

पाना व रिन्च का प्रयोग ताला तोड़ने में करते हैं। कुत्तो को भगाने व आत्मरक्षा के लिए गुलेल का प्रयोग करते हैं और पहचान छुपाने के लिए घटना के बाद कपडे बदल लेते है। ये इतने शातिर होते हैं के घटना के समय मोबाईल फोन का प्रयोग नहीं करते और मोबाईल फोन भी अपनी औरतो के पास रखते हैं। घटना के बाद चोरी के माल को गढढो मे गाड़ देते हैं तथा जेवरात को बेचने का काम अधिकांशतः औरते करती है। किसी घटना मे अच्छा जेवरात और नकदी मिलनेद पर तुरन्त स्थान बदल देते है और माल का बंटवारा कर दूरस्थ स्थानो पर अलग-अलग शिफ्ट हो जाते है। ये लोग चोरी करने के लिए जो पार्टी बनाते है। उसमें अलग-अलग स्थानों व शहरों के इनके सगे सम्बन्धी होते हैं। ऐसे में किसी एक के पकड़े जाने पर इनके परिवार के सदस्य अन्य सभी को मोबाईल फोन आदि से सूचित कर देते हैं। जिससे अन्य अभियुक्त आसानी से फरार हो जाते है और उन्हे पकडना बड़ा मुश्किल हो जाता है। चोरी के अलावा मेले आदि में उठाईगिरी व जेब काटने की घटनाओं को भी अंजाम देते है। इनका अन्तर्राज्यीय गिरोह है। जिसका उत्तराखण्ड के अतिरिक्त उ.प्र., राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र तथा राजस्थान आदि राज्यो मे नेटवर्क फैला हुआ है।

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