Sunday, June 26, 2022
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अभ्यर्थियों से खिलवाड बन चुका है प्रदेश की नियति, पहले भी हो चुकी हैं असहयोग से कई त्रुटियां – रविन्द्र आंनद, गढवाल मीडिया प्रभारी, AAP

उत्तराखंड :

आम आदमी पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी अमित जोशी ने भर्ती परीक्षा आयोजित करने वाले आयोग यूकेएसएसएससी पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने एक प्रेस बयान जारी करते हुए कहा कि यूकेएसएसएससी की कोई भी परीक्षा बिना विवाद के संपन्न नहीं हो पाती है।

उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के नाम पर छलावा कर रही है। उन्होंने कहा कि बीते साल आयोग द्वारा कराई गई परीक्षा में करीब 400 प्रश्न गलत पाया जाना बहुत ही गंभीर मुद्दा है। जिसकी हाईकमेटी स्तर से जांच की जानी चाहिए। अमित जोशी ने आगे कहा कि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने अब इस परीक्षा को रद्द कर दिया है ,जिसका खामियाजा प्रदेश के होनहारों को भुगतना पड रहा है।

उन्होंने आगे बताया कि उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग नेे सहायक समीक्षा अधिकारी (लेखा), लेखाकार, सहायक लेखाकार, कैशियर, लेखा परीक्षक, कार्यालय सहायक तृतीय (लेखा) के 662 पदों पर भर्ती के लिए पांच फरवरी 2021 को विज्ञप्ति जारी की थी। रिक्त पदों के सापेक्ष करीब 23 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। आवेदन की जांच के बाद इस परीक्षा के लिए 18,640 अभ्यर्थियों को प्रवेश पत्र जारी किए गए थे। ऑनलाइन परीक्षा के लिए देहरादून में छह, नैनीताल में चार, हरिद्वार में तीन, पौड़ी गढ़वाल में दो व चमोली, उत्तरकाशी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चंपावत व बागेश्वर में एक-एक परीक्षा केंद्र बनाए गए। ऑनलाइन परीक्षा 12 से 14 सितंबर 2021 के बीच छह पालियों में कराई गई। तीन दिन चली परीक्षा में 9341 अभ्यर्थी शामिल हुए।

उन्होंने आगे कहा कि आयोग ने सिर्फ परीक्षा संपन्न करवाने की खानापूर्ति की है जिससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य में बेरोजगारों के साथ खुलआम खिलवाड किया जा रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री ने बेरोजगारों को रोजगार देने की बात की थी और दूसरी ओर संपन्न परीक्षाओं को भी आयोग की गलतियों के कारण रद्द करना पड रहा है।

वहीं गढवाल मीडिया प्रभारी रविन्द्र आंनद ने बताया कि ये इस प्रदेश की नियति बन चुकी है कि बेरोजगारों को बिना लडे उनका हक नहीं मिलता है । उन्होंने कहा कि इसी तरह जुलाई 2020 में आयोजित हुई वन दरोगा की परीक्षा में भी 1800 में से 332 सवाल परीक्षा से हटा दिये गए थे। उसमें ये कहा गया था कि ये प्रश्न पाठ्यक्रम से बाहर से पूछे गए थे।

आखिर उत्तराखंड सेवा अधीनस्थ सेवा आयोग किन विशेषज्ञों से प्रश्न पत्र बनवाता है, जिनके बनाए प्रश्न पत्र में हर बार या तो प्रश्न गलत होते हैं या उत्तर में झोल होता है ।

उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में जांच करने के साथ ही दोषियों पर उचित कार्रवाई करनी चाहिए ताकि प्रदेश के बेरोजगारों और अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके।

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