हेल्थ

रात में बेचैनी के कारण नहीं आती है नींद, ये हैं इसके 7 कारण

◊◊◊  Nighttime Restlessness  ◊◊◊

रात में सुकून की नींद (Sleep) लेना कई कारणों से महत्वपूर्ण होता है. प्रॉपर नींद (Sound sleep) लेने से मानसिक और शारीरिक रूप से आप फिट और हेल्दी महसूस करते हैं. प्रतिदिन 7-8 घंटे सोने से मूड में सुधार होता है, एनर्जेटिक महसूस करते हैं. दिन में आलस सा महसूस नहीं होता, किसी भी काम को ध्यान लगाकर करने में मदद मिलती है. लेकिन, आजकल अधिकतर लोगों की नींद कई कारणों से प्रभावित रहती है. उन्हीं कारणों में से एक है बेचैनी (Restlessness) या घबराहट महसूस करना. रात में बेचैनी महसूस करने के कारण लोग बिस्तर पर करवटें बदलते रहते हैं. रात में देर तक जागकर काम करना और सुबह जल्दी उठने के कारण ऑफिस या घर का कोई भी काम सही से नहीं हो पाता है. ऐसे में आपको भी सोते समय बेचैनी महसूस (Nighttime Restlessness) होती है, तो इसके कई कारण हो सकते हैं, जिसे समय पर पहचानकर इसे दूर करने के उपायों को आजमाना चाहिए.

यूपीएमसी में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, आजकल हर किसी के सोने की आदतों में काफी बदलाव आया है. लोग देर रात तक बेचैनी महसूस करने के कारण बिस्तर पर करवटें बदलते रहते हैं. हालांकि, कभी-कभार रात में करवटें बदलते रहना, बार-बार उठकर बिस्तर पर बैठ जाना सामान्य हो सकता है, लेकिन क्रोनिक बेचैनी (chronic restlessness) आपके जीवन की गुणवत्ता पर एक बड़ा प्रभाव डाल सकती है, जिससे दिन में नींद आना, चिड़चिड़ापन, वजन बढ़ना और यहां तक ​​कि आपकी प्रतिरक्षा (Immunity) भी कम हो जाती है, जिससे आप वायरस के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं. ऐसे कई कारक हैं, जो रात में बेचैनी महसूस करने की समस्या को बढ़ाते हैं जैसे डाइट, हार्मोंस, स्ट्रेस आदि. यदि आपको इनमें से कोई भी समस्या नजर आती है, तो बेहतर है कि आप किसी डॉक्टर से कंसल्ट करें. रात में बेचैनी महसूस करने के कारण निम्न हो सकते हैं-

  • रेस्टलेस लेग सिंड्रोम
  • अनहेल्दी डाइट
  • ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया
  • हार्मोंस में उतार-चढ़ाव
  • देर रात में एक्सरसाइज करना
  • देर रात तक जागकर काम करना
  • स्ट्रेस से ग्रस्त होना

क्या है रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम

रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम (Restless Legs Syndrome) होने पर अक्सर लोग पैरों को सोते समय हिलाते रहते हैं. इसमें ऐंठन, झुनझुनी, जलन या रेंगने वाली संवेदनाएं महसूस होती हैं. इसकी वजह से रात में नींद टूटती है और बिस्तर से उतर कर टहलने से इस समस्या से राहत मिल सकती है. रेस्टलेस लेग्स सिंड्रोम के कारणों का पता सही से नहीं चल सका है, लेकिन यह वंशानुगत हो सकता है. महिलाओं को इस समस्या से पीड़ित होने की अधिक संभावना होती है. इसकी शुरुआत आमतौर पर 45 साल की उम्र के बाद होती है.

अनहेल्दी डाइट से भी होती है बेचैनी

जब आपका खानपान सही, पौष्टिक, हेल्दी नहीं होता है, तो उससे भी रात में अच्छी नींद नहीं आती है. बेचैनी, एंग्जायटी, स्ट्रेस के कारण नींद टूटती रहती है. रात में सोने से पहले कॉम्प्लेक्स शुगर या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स, कैफीन, एल्कोहल आदि के सेवन से भी गहरी नींद नहीं आती है और रात में बार-बार आपकी नींद टूटती रहती है. ये सभी खाद्य पदार्थ शरीर की सर्कैडियन लय में हस्तक्षेप करते हैं, जिससे नींद टूटती है.

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